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  • धान की खेती

    धान की खेती

    भारत एक कृषि प्रधान देश है, जहाँ की लगभग 80% आबादी खेती पर निर्भर है।
    धान की खेती न केवल मेहनत वाली है बल्कि इसमें समय, पानी, धैर्य और मेहनत — सबकी बहुत ज़रूरत होती है।

    धान की खेती में लगने वाला समय

    धान की खेती आमतौर पर 4 से 6 महीने का पूरा प्रोसेस होता है।
    इस दौरान किसान को खेत की तैयारी से लेकर कटाई और भंडारण तक हर कदम पर ध्यान देना पड़ता है।

    धान की खेती को तीन मुख्य चरणों में बाँटा जा सकता है:

    1. नर्सरी तैयार करना (बीज बोना)
    2. मुख्य खेत में रोपाई और रखरखाव
    3. कटाई, सुखाई और भंडारण

    हर चरण में अलग-अलग प्रकार की मेहनत और देखभाल की ज़रूरत होती है

    धान की खेती के प्रमुख चरण

    (1) भूमि की तैयारी

    धान की खेती शुरू करने से पहले खेत की तैयारी सबसे कठिन चरणों में से एक है।

    • खेत को पहले जुताई करके समतल किया जाता है।
    • फिर पानी भरकर उसे “कीचड़” जैसी स्थिति में लाया जाता है।
    • इसके बाद खेत में नर्सरी तैयार की जाती है जहाँ बीज बोए जाते हैं।

    इस पूरी प्रक्रिया में ट्रैक्टर, हल, लेवलर और सिंचाई उपकरणों का इस्तेमाल होता है।
    अगर ये सब हाथ से किया जाए तो बहुत ज़्यादा मेहनत लगती है।

    (2) नर्सरी तैयार करना

    किसान पहले से चुने गए बीजों को साफ पानी में 24 घंटे तक भिगोते हैं।

    फिर उन्हें 48 घंटे तक कपड़े में लपेटकर अंकुरित किया जाता है।

    इसके बाद इन्हें नर्सरी में बोया जाता है।

    लगभग 25-30 दिनों बाद जब पौधे 15-20 सेमी ऊँचे हो जाते हैं, तब रोपाई के लिए तैयार हो जाते हैं।

    (3) रोपाई

    यह धान की खेती का सबसे मेहनत भरा काम है।

    • किसानों को कमर झुकाकर पानी भरे खेतों में पौधे रोपने होते हैं।
    • एक-एक पौधा हाथ से लगाया जाता है ताकि खेत में समान दूरी बनी रहे।
    • यह काम कई दिनों तक चलता है और इसमें श्रमिकों की भारी मेहनत लगती है।

    रोपाई के समय कीचड़ में लगातार झुककर काम करना किसानों के लिए शारीरिक रूप से बहुत थकाने वाला होता है।
    इस वजह से इसे “सबसे मेहनत वाला चरण” कहा जाता है।

    (4) निराई-गुड़ाई और खाद डालना

    • धान के खेत में खरपतवार (weed) बहुत तेजी से उगते हैं, इसलिए उनकी सफाई बार-बार करनी पड़ती है।
    • किसान जैविक या रासायनिक खाद (urea, DAP, potash) डालते हैं ताकि पौधे स्वस्थ रहें।
    • यह काम भी समय-समय पर करना पड़ता है।

    (5) कीट और रोग नियंत्रण

    धान की फसल पर कई कीट और रोग हमला करते हैं जैसे:

    • भूरे धब्बे की बीमारी (Brown Spot)
    • ब्लास्ट रोग
    • पत्ती झुलसा रोग
    • तना छेदक कीट (Stem Borer)

    इनसे बचाव के लिए स्प्रे और जैविक उपचार बार-बार करना पड़ता है, जो एक और मेहनत का काम है।

    6) कटाई

    जब पौधे पीले पड़ने लगते हैं और दाने पक जाते हैं, तो कटाई का समय आता है।

    कटाई के समय भी किसान को दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है, क्योंकि बारिश का खतरा हमेशा बना रहता है।

    • पारंपरिक तरीके में किसान हंसिया से कटाई करते हैं।
    • आधुनिक किसान कंबाइन हार्वेस्टर का इस्तेमाल करते हैं।
    • कटाई के बाद धान को धूप में सुखाया जाता है ताकि नमी निकल जाए।

    (7) मड़ाई और भंडारण

    कटाई के बाद धान को मड़ाई (थ्रेशिंग) से गुजारा जाता है ताकि दाने अलग हो सकें।
    फिर उन्हें सुखाकर बोरी में भरकर भंडारण किया जाता है।
    अगर सही तरह से सुखाया न जाए तो दाने सड़ सकते हैं।

    लागत और मुनाफा

    धान की खेती में प्रति एकड़ ₹25,000 से ₹40,000 तक लागत आ सकती है —
    जिसमें बीज, खाद, पानी, मजदूरी और कीटनाशक शामिल हैं।

    अगर मौसम अच्छा रहा तो उत्पादन प्रति एकड़ 25–35 क्विंटल तक मिल सकता है।
    औसतन किसान को प्रति एकड़ ₹60,000–₹80,000 की आमदनी होती है।
    यानी शुद्ध लाभ लगभग ₹20,000–₹30,000 प्रति एकड़ रह सकता है।

    लेकिन अगर बारिश या कीटों का असर हुआ तो पूरा नुकसान भी हो सकता है।

    Dhaan ki kheti aasan hai